नवनीत गुर्जर का कॉलम:आसमान बुझता ही नहीं, और दरिया रौशन रहता था; आखिर क्यों देवभूमि विचलित हो उठी है, क्यों बादल फटने लगे?



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नवनीत गुर्जर का कॉलम:आसमान बुझता ही नहीं, और दरिया रौशन रहता था; आखिर क्यों देवभूमि विचलित हो उठी है, क्यों बादल फटने लगे? नवनीत गुर्जर का कॉलम:आसमान बुझता ही नहीं, और दरिया रौशन रहता था; आखिर क्यों देवभूमि विचलित हो उठी है, क्यों बादल फटने लगे? Reviewed by Midday News on October 21, 2021 Rating: 5

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